Thursday, May 25, 2017

सौंफ के स्वास्थ्य लाभ, मात्रा, दुष्प्रभाव और प्रयोग विधि

सौंफ़

सौंफ (Saunf) भारत की एक प्रसिद्ध खाद्य योजक है जिसका प्रयोग न केवल भोजन में हालाँकि औषधि के रूप में भी किया जाता है। आयुर्वेद में इसके कई विशेष गुणों का वर्णन किया गया है। सौंफ को इंग्लिश में फेंनेल सीड (Fennel Seeds) कहा जाता है और यह Foeniculum Vulgare पौधे के यह बीज होते है। सौंफ़ सुगन्धित और स्वादिष्ट सूखे बीज होते हैं। यह शानदार स्वाद प्रदान करता है और अक्सर भारतीय खाना पकाने में उपयोग किया जाता है।

सौंफ़ का स्वाद

सौंफ़ का स्वाद में मधुर, कटु और तिक्त होता है। भारत में सामान्यतः लोग भोजन के बाद सोंफ के बीज चबाते हैं क्योंकि यह भोजन को पचाने में मदद करता है और पेट में गैस के गठन को रोकता है। यह एक सुगंधित जड़ी बूटी है, जिसे मुंह को ताज़ा रखने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। यह मसूड़ों और दांत के विकारों में भी राहत देता है।

सौंफ़ के लाभ

सौंफ़ में कई स्वास्थ्य को लाभ पहुँचाने वाले पोषक तत्व, खनिज और विटामिन होते हैं। सौंफ़ का बीज का उपयोग अपचन, अतिसार, शूल और श्वसन संबंधी बीमारियों के उपचार में किया जाता है। यह आंख की समस्याओं और मासिक धर्म संबंधी विकारों में भी फायदेमंद है।

सौंफ वजन घटाने में मदद करता है

सौंफ वजन घटाने में मदद करता है। सौंफ़ बीज वसा के चयापचय (Fat Metabolism) पर कार्य करता है। इसको बढ़ा देता है और संचित हुई वसा को कम करने में सहायता करता है।

हालांकि यदि सौंफ का प्रयोग कम मात्रा में किया जाये तो यह भूख बढ़ा सकता है और एक पाचक औषधि के रूप में कार्य करता है। पर सौंफ की चाय के ऊपर किये गए कुच्छ खोज अध्ययनों द्वारा इसके भूख कम करने के गुण का भी पता लगा है।

दरअसल, यह आपकी भूख को प्राकृतिक रूप में रखता है जैसा कि यह होना चाहिए और आपको भूख पर अच्छा नियंत्रण प्राप्त करने में मदद करता है।

यदि आप को भूख कम लगती है, तो यह गैस्ट्रिक स्राव को व्यवस्थित करने और जिगर कार्यों को सुधारने में मदद करता है और अंततः आपकी भूख को सामान्य बनाता है। यह अति गैस्ट्रिक स्राव को भी बेअसर करता है और पेट का तेजाब कम करने में मदद करता है।

यदि आप को भूख ज्यादा लगती हो और भोजन में लालसा अधिक हो, तो यह भूख को सामान्य करने में भी मदद कर सकती है और भोजन के स्वाभाविक नियंत्रण में सुधार कर सकती है। बहुत से लोगों ने सौंफ़ के बीज का उपयोग करने के बाद भोजन लालसा पर अच्छा नियंत्रण हो जाने की सूचना दी है। पर यह भी देखा गया है की उनकी सौंफ खाने के प्रति लालसा बढ जाती है।

उम्र बढ़ने और कैंसर को रोकता है

सौंफ़ में कुएर्स्टिन (quercetin) और कैम्प्फेरोल  (kaempferol) जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं। ये एंटी ऑक्सीडेंट शरीर में जहरीले कणों को हटाते हैं और कैंसर, अन्य रोगों और उम्र बढ़ने को रोकते हैं। शरीर की त्वचा एक व्यक्ति की उम्र बताती है। सौंफ़ बीज में उपस्थित एंटी ऑक्सीडेंट त्वचा को साफ़ और युवा रखने में मदद करते हैं।

सौंफ़ बीज में उपस्थित फाइबर बृहदान्त्र के कैंसर से सुरक्षा करते हैं। सौंफ के तेल को अन्य मालिश वाले तेल में मिला कर मालिश करने से त्वचा का रंग निखरता है और झुर्रियों से बचाव होता है।

सौंफ बीज को पानी में भिगोकर, फिर शहद और दलिये के साथ मिलाकर पेस्ट बनाया जाता है, जो की त्वचा की उम्र बढ़ने से रोकने के लिए एक बहुत अच्छा फेस पैक है। यह चेहरे की त्वचा को साफ़, दृढ़ और ताज़ा करने के लिए एक बहुत ही प्रभावी स्क्रब है।

पाचन में मदद करता है

सौंफ़ बीज आहार फाइबर का एक समृद्ध स्रोत है। हमारे शरीर को पेट के बेहतर कार्य के लिए अघुलनशील फाइबर की आवश्यकता होती है। यह कब्ज नहीं होने देता और यदि कब्ज हुई हो, तो यह कब्ज के इलाज के लिए भी एक उत्तम औषधि है।

फाइबर पित्त लवण से बंधते हैं और इसे प्रणाली में अवशोषित होने से रोकते हैं। कोलेस्ट्रॉल द्वारा निर्मित पित्त लवण शरीर के लिए हानिकारक होते हैं और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाते हैं। सौंफ़ का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखने में मदद मिल सकती है। यह एक वमन विरोधी, पेट साफ़ करने वाली और यकृत विकार दूर करने वाली जड़ी बूटी है।

खनिज, विटामिन और तेल का अच्छा स्रोत

यह लोहा, कॉपर, पोटेशियम, मैंगनीज, जिंक, मैग्नीशियम और सेलेनियम का अच्छा स्रोत है। मानव शरीर के उचित कामकाज के लिए इन सभी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।

सौंफ़ विटामिन ए, विटामिन ई, विटामिन सी और बी-कॉम्प्लेक्स विटामिनों का भंडार है। यह सभी विटामिन इन बीजों में संकेन्द्रित रूप में होते हैं। इसमें आवश्यक तेल होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभप्रद हैं। यह तेल वायुनाशी गुण के होते हैं और पेट के बेहतर कामकाज में मदद करते हैं। सौंफ़ का तेल मांसपेशियों के दर्द में राहत देता है। इसलिए, विशेष रूप से आयुर्वेद में इसका उपयोग मालिश मिश्रणों में किया जाता है। यह नसों को शान्त करता है और मानसिक स्पष्टता को बढ़ावा देता है।

शीतलक के रूप में कार्य करता है

सौंफ़ के बीज में गुण होते हैं, जो शरीर को ठंडक पहुँचाते हैं। आम तौर पर लोग झुलसा देने वाली गर्मी के दौरान गर्मी से राहत पाने के लिए सौंफ बीज पेय का सेवन करते हैं।

सौंफ का औषधीय उपयोग

सौंफ को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह विशेषकर पाचन संबंधित रोगों के उपचार ले लाभदायक है।

सामान्य जुखाम

सौंफ़ ठंड को समाप्त करती है। सौंफ़ के बीज में अल्फा-पिनन (alpha-pinene) और क्रेओसॉल (creosol) होते हैं, जो सीने की जकडन को काम करता है, और खांसी ठीक करता है।

ब्रोंकाइटिस और अस्थमा

उबले हुए सौंफ बीज और पत्तियों को सूंघने से अस्थमा और ब्रोंकाइटिस में राहत मिलती है।

गले में खराश

सौंफ़ बीज ग्रसनीशोथ और गले में खराश या साइनस की समस्याओं के लिए अच्छे होते है।

स्तन का दूध बढ़ाता है

सौंफ़ बीज स्तनपान कराने वाली माताओं में दूध के उत्पादन में सुधार करने में मदद करता है।

शिशुओं में सौंफ बीज

सौंफ़ बीज पेट और आंतों के विकारों में राहत देने में मदद करता है। शिशुओं में सौंफ़ का तेल उदरशूल से मुक्त करता है।

साँप का काटना

साँप के काटने में सौंफ का पाउडर पुल्टिस की तरह प्रयोग किया जाता है।

तापघात

तापघात (Heat stroke) के मामले में, रात भर पानी में मुट्ठी भर सौंफ को भिगो दें। सुबह नमक की एक चुटकी के साथ इस पानी को लें।

सौंफ़ तेल मालिश

सौंफ़ तेल को मसाज तेल मिश्रण में प्रयोग करने से शरीर का  शोधन करने में मदद मिलती है। इस मालिश के कारण, शरीर में विषैले पदार्थ कम हो जाते हैं जो की गठिया, प्रतिरोधक क्षमता विकार और एलर्जी जैसी स्थितियों को पैदा करते हैं।

आयुर्वेद में सौंफ

आयुर्वेद के अनुसार, औषधि के रूप में सौंफ का उपयोग सभी तीनों दोषों त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) को कम कर देता है। इसका स्वाद मीठा, कसैला और कड़वा होते है।

शरीर पर सौंफ का शीतलन प्रभाव पड़ता है। इसके पत्ते मुख में मीठा और कड़वा स्वाद देते हैं। आयुर्वेद सौंफ को न पकाने की सलाह देता है। पकाने से सौंफ के गुण मर जाते है, इसलिए इसे भिगोकर प्रयोग करें। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

सौंफ का पानी

नीचे दी गयी विधि से सौंफ के पानी को बनाये जा सकता है:

पांच चम्मच सौंफ के बीज एक कप पानी में दो घंटे के लिए भिगो दें।सौंफ़ के बीज को निचोड़ें और आगे के उपयोग के लिए सौंफ़ के पानी को अलग रखें।सौंफ़ के बीज को बारीक पीस लें।निचुड़े हुए पानी को इस में मिला दें और तीन घंटे के लिए रख दें ताकि सभी सक्रिय घटक पानी में अवशोषित हो जाएँ।मिश्रण को फिर से निचोड़ लें और सौंफ़ के पानी को अलग करें।सौंफ़ के बीज के पेय को फ्रिज में ठंडा करें और इसे ठंडा ही पीने के लिए दें।यदि आवश्यक हो तो शर्करा मिलायें।

सौंफ की चाय

सौंफ की चाय का सेवन करने से गले की खराश और जठरांत्र संबंधी परेशानियों में राहत मिलती है। सौंफ की चाय नियमित रूप से पीने से शरीर का शोधन करने में मदद मिलती है।

नीचे दी गयी विधि से सौंफ की चाय को बनाया जा सकता है।

सौंफ़ के बीज को मोटा मोटा कूट लें।पानी उबाल लें और सौंफ़ पाउडर को मिला दें।पात्र पर एक ढक्कन रखें और आंच बंद करें।5 मिनट के बाद सौंफ़ की चाय छान लें।शहद या गुड़ को मिलायें और गर्म पीयें।

सौंफ़ मात्रा एवं सेवन विधि (Dosage)

सौंफ़ की सामान्य औषधीय मात्रा  व खुराक इस प्रकार है:

सौंफ मात्रा

बच्चे 500 मिलीग्राम से 2 ग्राम

वयस्क3 से 6 ग्राम

गर्भस्थ1 से 2 ग्राम

वृद्ध (वृद्धावस्था) 2 से 3 ग्राम दिन में दो बार

सौंफ़ का पानी

शिशु 1 से 5 मिलीलीटर

बच्चे 5 से 10 मिलीलीटर

वयस्क 10 से 20 मिलीलीटर

गर्भस्थ 5  से 10 मिलीलीटर

वृद्ध (वृद्धावस्था) 5 से 10 मिलीलीटर दिन में दो बार

सौंफ की चाय

शिशु 1 से 5 मिलीलीटर

बच्चे 20 से 50 मिलीलीटर

वयस्क 50 से 100 मिलीलीटर

गर्भस्थ 20 से 50 मिलीलीटर

वृद्ध (वृद्धावस्था) 20 से 50 मिलीलीटर दिन में दो बार

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?)

खाना खाने के बाद लें

दिन में कितनी बार लें?

2 बार – सुबह और शाम 

अनुपान (किस के साथ लें?)

चबा कर खाए, या गुनगुने पानी के साथ 

उपचार की अवधि (कितने समय तक लें)?

कम से कम 3 महीने या चिकित्सक की सलाह लें

सौंफ़ प्रति दिन 15 ग्राम से कम लेना सुरक्षित माना जाता है।

सौंफ के दुष्प्रभाव (Side Effects)

कम मात्रा में सौंफ़ का उपयोग खाना पकाने में सुरक्षित है। कई घरेलू उपचारों में सौंफ़ के बीज का उपयोग किया जाता है, लेकिन कोई शोध उपलब्ध नहीं है, जो यह सिद्ध करे कि सौंफ बीज औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयोग किये जाने पर वयस्क या बच्चों के लिए सुरक्षित है।

लोगों को इसे लेने से पहले अपने चिकित्सक से पूछ लेना चाहिए क्योंकि दवाइयों के रूप में इसका उपयोग करने से कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती है।

सौंफ़ की एलर्जी

अजवाइन और गाजर के प्रति संवेदनशील लोगों को सौंफ़ बीज से एलर्जी हो सकती है।सौंफ का उपयोग लोगों की त्वचा को अतिरिक्त संवेदनशील बना सकता है।

सावधानियां

यदि कोई व्यक्ति ऐसे रोग से पीड़ित है जिसमें एस्ट्रोजेन के प्रभाव से स्थिति ज्यादा खराब हो जाए, तो सौंफ़ को नहीं लेना चाहिए, उदहारण के लिए स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर आदि।कुछ लोगों को सौंफ़ का उपयोग करने से त्वचा की एलर्जी की प्रतिक्रिया होती है।

सौंफ़ तेल की सुरक्षा प्रोफ़ाइल

वैज्ञानिक अनुसंधान ने यह साबित कर दिया है कि स्तनपान करने वाले शिशुओं के पेट दर्द में सौंफ का तेल सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी खुराक दिन में दो बार एक हफ्ते तक होनी चाहिए। सौंफ़ के तेल का उपयोग साबुन, टूथपेस्ट और माउथ फ्रेशनर बनाने में भी किया जाता है।

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