Wednesday, August 30, 2017

सभी प्रकार के दर्द को ठीक कर सकता है एल्यूमिनियम फॉयल

दर्द को दूर किया जा सकता है। एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण से भरपूर है। फॉयल जुकाम में भी मदद करता है। फॉयल में चिकित्‍सिय गुण होते हैं।

एल्‍यूमिनियम फॉयल का इस्‍तेमाल अक्‍सर खाने को पैक करने के लिए करते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि नियमित रूप से एल्‍यूमिनियम फॉयल का इस्‍तेमाल खाने को रैप करने के अलावा कुछ स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के उपचार के लिए किया जा सकता है। जी हां यह बात एक नये शोध से सामने आई है कि एल्‍यूमिनियम फॉयल के इस्‍तेमाल से शरीर के किसी भी अंग में होने वाले दर्द को दूर किया जा सकता है। आइए इसके बारे में हम विस्‍तार से बताते हैं।दर्द के लिए एल्यूमिनियम फॉयल

अगर आपके गर्दन, पीठ, कंधे, घुटने या पैरों में दर्द है, तो दर्द वाले हिस्‍से में एल्‍यूमिनियम फॉयल का इस्‍तेमाल करें। आप देखेंगे कि समय की एक निश्चित अवधि के बाद आपका दर्द गायब हो जाएगा। एल्‍यूमिनियम फॉयल में चिकित्‍सिय गुण होते हैं और अक्‍सर चीनी और रूसी चिकित्‍सकों द्वारा इसका इस्‍तेमाल किया जाता है।

एल्‍यूमिनियम फॉयल से कैसे करें उपचार?

एल्‍यूमिनियम फॉयल का एक टुकड़ा लेकर, दर्द वाले जगह लगाकर उसपर बैंडेज बांध दें। एल्यूमिनियम फॉयल गर्दन, पीठ, हाथ, पैर, जोड़ों और इसी तरह के दर्द के इलाज के लिए उत्कृष्ट होता है। इसके अलावा यह गठिया और निशान के इलाज के लिए भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है।


एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण से भरपूर

एल्‍यूमिनियम फॉयल में बहुत अधिक मात्रा में एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण होते हैं। गाउट का इलाज करते समय फॉयल के टुकड़े को निशान पर लगाना या अंगूठे पर लपेटकर बैंडेज बांधना जरूरी होता है। चीनी चिकित्‍सकों का विश्‍वास है कि यह इलाज कम से कम 10 से 12 घंटे के लिए किया जाना चाहिए। शरीर के दर्दनाक हिस्‍से पर एल्‍यूमिनियम फॉयल लगाकर रात भर के लिए छोड़ देना चाहिए। फिर 1 से 2 सप्‍ताह का ब्रेक लेने के बाद यदि आवश्‍यक हो तो इलाज को दोहराना चाहिए।

एल्यूमिनियम फॉयल जुकाम में भी मदद करता है

जुकाम होने पर भी आप एल्‍यूमिनियम फॉयल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए 5-7 परतों में फॉयल को अपने पैर पर लपेटें और प्रत्‍येक परत के बीच कागज और पतला सा कपड़ा लगाये। इसे कुछ घंटों के लिए ऐसे ही रहने दें। दो घंटे के बाद इसे निकाल कर रीसेट करें। फिर से कुछ देर के लिए इसे ऐसे ही रहने दें। उपचार को तीन बार दोहराया जाना चाहिए।

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