Sunday, October 15, 2017

क्या कारण हैं क्यूं नहीं घट रहा आपका वजन ??

टों वॉक की, जिम गए, पसीना बहाया, एक्सरसाइज, डाइटिंग की, मगर वजन था कि टस से मस न हुआ..। आखिर 2-3 किलो वजन घटाना भी इतना मुश्किल कैसे हो जाता है?


स्लिम-ट्रिम होना किसे नहीं भाता! लेकिन छरहरापन अब नॉस्टैल्जिया बन चुका है। वो भी क्या दिन थे जब दुबले हुआ करते थे! 40 की उम्र पार करते ही28 इंची कमर को कमरा बनते देर नहीं लगती, सैल्युलाइट अपनी परतें दिखा-दिखा कर चिढाने को उतावला रहता है और वेइंग मशीन की सुई आगे बढती जाती है। क्यों होता है ऐसा? कहां गलती करते हैं हम? आइए जानें वे कौन से सवाल हैं जो वजन घटाने की प्रक्रिया में हमारे मन में उठते हैं और इनके सही जवाब क्या हैं।

सवाल 1

घटता नहीं वजन

डाइटिंग के शुरुआती दौर में तात्कालिक लाभ होता है। वजन घटता है तो खुशी का आलम नहीं रहता, लेकिन यह इसी पर टिका नहीं रहता। थोडी हेर-फेर होते ही यह फिर बढ जाता है। इसका एक कारण यह है कि डाइटिंग के दौरान लोग अकसर कैलरीज बहुत घटा देते हैं और इससे तुरंत वजन घटता है। शुरुआत में यह फूड रिजेक्शन अच्छा लगता है, लेकिन जल्दी ही शरीर में किसी न किसी तत्व की कमी होने लगती है, जिसका नतीजा होता है डिप्रेशन, थकान या फटीग। आखिर व्यक्ति को फिर से अपने पुराने शेड्यूल में वापस लौटना पडता है। वजन घटाने में विफल होने पर इसका भावनात्मक प्रभाव भी गहरा होता है। यह इमोशनल मेंटल स्टेज व्यक्ति को ज्यादा खाने को प्रेरित करती है, व्यक्ति जाने-अनजाने अधिक खाता है और फिर से अपने पुराने बॉडी शेप में वापस आ जाता है।

सवाल 2

कैलरीज का मेल

कितनी कैलरीज ठीक हैं.., यह सवाल हर डाइटिंग करने वाले के मन में उठता है। सामान्य तौर पर एक वयस्क पुरुष के लिए 1800 और स्त्रियों के लिए 1500 कैलरीज ठीक समझी जाती हैं। डाइटिंग के दौरान लगभग 500 कैलरीज तक घटा दी जाती हैं।

शोध बताते हैं कि डाइटिंग में आमतौर पर लोग जिमिंग या एक्सरसाइजिंग के दौरान बर्न की गई कैलरीज की गलत गणना करते हैं। जैसे, लोग मान लेते हैं कि जंक फूड से भरे संडे की शाम एक घंटा जिम में पसीना बहा लेना काफी है, जबकि ऐसा नहीं होता।

सवाल 3

कार्बोहाइड्रेट्स का खेल

शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के लिए कार्ब जरूरी है। 55 से 65 प्रतिशत कुल कैलरीज हमें कार्बोहाइड्रेट्स से ही मिलती हैं। ये शरीर के लिए ईधन की तरह हैं। डाइटिंग के दौरान कार्ब कम करने से ग्लाइकोजन स्तर घट जाता है और शरीर ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत अमीनो एसिड की तरफ बढता है। इससे मसल टिश्यू को हानि पहुंचती है। कार्ब कम करने से ज्यादा जरूरी मसल्स टिश्यूज को बचाना है। मेटाबॉलिज्म के लिए भी कार्ब अनिवार्य है। लैप्टिन और अन्य फैट बर्निग हॉर्मोस बॉडी फैट से सीधे जुडे हैं। कार्ब बढने पर लैप्टिन का स्तर बढता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म बढता है। शरीर को कार्ब की उतनी ही जरूरत है, जितनी किसी भी अन्य न्यूट्रिएंट्स की। इसलिए डाइटिंग में कार्ब को पूरी तरह कट न करें, लेकिन अपनी डाइट में रिफाइंड कार्ब जैसे मैदा और इसके प्रोडक्ट्स, शुगर, सफेद चावल के बजाय फ्रूट्स, वेजटेबल्स की मात्रा बढाएं ताकि कार्बोहाइड्रेट्स पर्याप्त मात्रा में मिलते रहें।

सवाल 4

फैट्स की मार

वजन घटाने का नियम यह है कि जितनी कैलरीज बर्न कर सकते हैं, उससे कम कैलरीज लें। अगर दो किलो वजन घटाना हो तो लगभग 500 कैलरीज घटानी होंगी या इतना व्यायाम बढाना होगा कि 500 कैलरीज बर्न कर सकें। डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थो को को प्राथमिकता दें, जिनसे कैलरीज तो घटें लेकिन सेहत पर नकारात्मक असर न पडे। अच्छे और बुरे फैट के अंतर को समझना भी जरूरी है। रेड मीट के बजाय बींस, फैट-फ्री मिल्क प्रोडक्ट्स लेने से सैच्युरेटेड फैट कम होगा। ओमेगा-3 फैटी एसिड्स के लिए फिश, वॉलनट्स, सोयाबीन ऑयल का प्रयोग दिन में एक बार जरूर करें। भोजन में ताजी हरी सब्जियां और फ्रूट्स की मात्रा बढा दें।

डाइट से चार फूड ग्रुप सीआरएपी कट करें। ये हैं कैफीन, रिफाइंड शुगर, एल्कोहॉल और प्रोसेस्ड फूड्स।

डाइट ऐक्शन प्लान

1. कोई भी मील स्किप न करें, खासतौर पर ब्रेकफस्ट। सुबह के नाश्ते में भरपूट प्रोटीन लें। नए शोध बताते हैं कि प्रोटीनयुक्त नाश्ते से फूड क्रेविंग कम होती है और वजन भी घटता है। ब्रेकफस्ट में अंडे, स्प्राउट्स, सीरियल्स, दही और ग्रीन टी शामिल करें।

2. छोटे-छोटे कई मील लें। ज्यादा देर तक पेट खाली होने से गैस की समस्या होती है। इससे व्यक्ति को लगता है मानो पेट बहुत भरा है, जबकि शरीर में न्यूट्रिएंट्स की कमी होने लगती है। ठीक से ब्रेकफस्ट न करने से व्यक्ति ब्रंच या लंच में ज्यादा खा लेता है।

3. मुख्य भोजन से 30 मिनट पहले फ्रूट्स खाएं, इससे वे आसानी से पचेंगे। खाली पेट फ्रूट्स खाने से सिस्टम डिटॉक्सीफाई होता है, साथ ही शरीर को ऊर्जा भी मिलती है।

3. दिन भर में 8 से 10 ग्लास पानी पीना जरूरी है। खाने के बीच में पानी पीने से पाचन क्रिया सुस्त हो जाती है, इसलिए भोजन के बीच में पानी पीने से बचें। जरूरी हो तो छोटे-छोटे सिप लें। खाने से कम से कम 15 मिनट पहले या बाद में पानी पिएं।

4. भोजन को अच्छी तरह चबाएं। शोध बताते हैं कि भोजन को चबाने में जितना अधिक समय लगाएंगे, उतना ही कम कैलरीज लेंगे। देर तक चबाने से ब्रेन को यह संदेश जाता है कि पेट भर चुका है। खाने के हर कौर को 35 से 50 बार तक चबाएं।

5. भोजन करते हुए इधर-उधर ध्यान न दें। याद है, जब मां खाते समय पढने या टीवी देखने से मना करती थीं! मल्टीटास्किंग का खयाल खाने के समय छोड दें। इससे खाने से ध्यान हटता है और ज्यादा भी खा लेते हैं।

6. रात 8 बजे के बाद भारी भोजन से बचें। भारतीय जीवनशैली में अब यह मुश्किल काम है, लिहाजा डिनर को लिक्विड फॉर्म में रखें और कम कैलरीज वाले खाद्य पदार्थ चुनें।

फिटनेस ऐक्शन प्लान

1. रोज वॉक करें, लेकिन वॉक करते समय बातचीत से बचें। एक बार में कम से कम 25 मिनट तक लगातार ब्रिस्क वॉक करें, तभी अपेक्षित नतीजे मिलेंगे। 10 मिनट में कम से कम एक किलोमीटर तक चलें।

2. एक जैसे व्यायाम रोज करने से शरीर को फायदा हो सकता है, लेकिन वजन पर खास फर्क नहीं पडता। बेहतर है वजन के लिए अपने ट्रेनर या विशेषज्ञ से अलग व्यायाम सीखें और इन्हें बदल-बदल कर करें।

3. लगातार एक समान ट्रैक पर वॉकिंग या जॉगिंग से बचें। अपने पार्क में कुछ असमतल जगह तलाशें और वहां भी चलें।

4. लोअर बैली एक्सरसाइजेज करें, लेकिन इसके लिए विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। सर्जरी, प्रेग्नेंसी या पीरियड्स के दौरान कई तरह के व्यायाम वर्जित होते हैं, इन्हें न करें।

5. एक बार में 30 मिनट तक एक्सरसाइज के लिए समय न हो तो दिन में दो से तीन बार 10-10 मिनट की एक्सरसाइज करें। हार्ड नहीं, स्मार्ट एक्सरसाइज करें।

चेकलिस्ट

-नतीजे देखें-परखें और अपने फीडबैक से सीखें। देखें कि एक हफ्ते में ऐसी कौन सी गलती की जिससे वजन बढा या किस तरह की डाइट से वजन घटा।

-एक-दो महीने में पांच-दस किलो वजन घटाने का सपना न देखें। ऐसा लक्ष्य बनाएं-जिसे हासिल कर सकें। पिछले दस वर्षो में वजन बढने की प्रक्रिया के बारे में सोचें। हर साल कितने किलो वजन बढा? जीवनशैली में आए बदलावों पर भी गौर करें। शारीरिक गतिविधियां बढाने के बारे में सोचें। लंबे समय तक एक स्थिति में बैठ कर काम न करें। तनाव और दबाव घटाएं।

-30 की उम्र के बाद नियमित वजन चेक करें। जैसे ही यह 1-2 किलो बढे, तुरंत उसे संतुलित करने के प्रयास में जुट जाएं।

-डाइटिंग के बजाय सेंसेबिल ईटिंग प्लान के बारे में सोचे। इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। एक सी ईटिंग हैबिट्स रखें।

-डायरी नोट्स लिखें। अगर डार्क चॉकलेट का एक बडा पीस मुंह में डाला है तो अगले मील में कितनी कैलरी घटानी हैं, इसे भी ध्यान में रखें।

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